मनोरंजन

कंटक-पथ आसान नहीं – मीनू कौशिक

है कंटक-पथ आसान नहीं,

लेकिन चलना तो होगा ही ।

माना आग उगलता सूरज ,

लेकिन ढलना तो होगा ही ।

कब तक पथ रोकेगी किस्मत,

कब तक राह डराएगी ?

असफलता को श्रम-अग्नि में,

लेकिन जलना तो होगा ही ।।

 

मनोबल और भुजबल ने,

सदा किस्मत को जीता है ।

थका , हारा , डरा प्राणी ,

निराशा विष को पीता है ।

समस्याएँ अगर जग में ,

तो हल भी साथ हैं उनके ,

नहीं कारण कोई ऐसा ,

जो घुट-घुट मरके जीता है ।।

✍️.. मीनू कौशिक “तेजस्विनी”, दिल्ली

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button