मनोरंजन
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आभा, मेरे जीवन का उजाला – डॉ अनमोल कुमार
43 साल पहले जब थामा था तेरा हाथ, तब जाना था आभा, तू है मेरे जीवन का साथ। तेरे नाम…
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मोह बहुत मोहीला – अनिल भारद्वाज एडवोकेट
यह मोह बहुत ही मोहीला होता है, लेकिन उतना ही दर्दीला होता है। जब कभी किसी से मोह टूट जाता…
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वक़्त का स्पर्श – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
वक़्त ही घाव बनकर आया, चुपके से दिल को आज़माया, टूटी साँसों की सरगम में, दर्द का साया गहराया। वक़्त…
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याद तेरी आती है – नीलांजना गुप्ता
अधर रहते मौन लेकिन नज़र कुछ कह जाती है तू चला जाता है लेकिन याद तेरी आती है देखती…
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बदल गया इंसान (लघुकथा) – डा. सहदेव बालियान
utkarshexpress.com – ज्येष्ठ महीने की चिलकती धूप वाली तेज गर्मी पड़नी शुरू हो गई थी.सुबह शाम क्यारी के पेड़-पौधों की…
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धड़कन और ज़िंदगी – रुचि मित्तल
धड़कन और ज़िंदगी की दोस्ती भी कम अजीब नहीं एक चलती है तो दूसरी साँस लेती है, एक रुक जाए…
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पीड़ा से जग अनजाना – सीमा शुक्ला
डाली से टूटी लतिका की पीड़ा से जग अनजाना। देखा किसने तरुणाई में कलियों का ओ मुरझाना। दीप करे जगमग…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
यार मिलकर दुआ तो देते हैं, जानकर फिर भुला तो देते हैं। छोड़कर वो भले गये हमको, फिर भी…
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भगवद् कृपा न जाहु बखानी – सुनीलानंद
( 1 ) श्री हरि कृपा अनन्य भक्ति से मिले, कर न सकें इसे बखान ! है ये भावों का…
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पिता – सविता सिंह
पिता को लिखूँ, इतना सामर्थ्य कहाँ!” मेरी सामर्थ्य कहाँ, जो मैं पिता को शब्दों में बाँधूँ, जिन्होंने स्वयं मुझे गढ़ा…
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