मनोरंजन
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मां की अलमारी (लघु कथा) – कंचन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – रीता का जीवन खुली किताब थी जिसे कोई भी पढ़ सकता था।हो भी क्यों ना ऐसा कुछ था…
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अदरक की चाय – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
सुबह की ठंडी अंगड़ाई में, जब सूरज धीरे मुस्काता है, मिट्टी की खुशबू संग अदरक, मन का कोना महकाता है।…
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पीड़ा से जग अनजाना – सीमा शुक्ला
डाली से टूटी लतिका की पीड़ा से जग अनजाना। देखा किसने तरुणाई में कलियों का ओ मुरझाना। दीप करे जगमग…
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नीला ड्रम – डॉ अणिमा श्रीवास्तव
अब तो रिश्ते ढोए जा रहे हैं, कोरे भ्रम में, इसलिए लाशें मिल रहीं है , नीले ड्रम में। रूहानी…
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स्त्री – कंचन श्रीवास्तव
स्त्री खुश होती है छोटे छोटे अहसासों से जैसे जाड़े में सूखे कड़क कपड़ों से पति बच्चों की जरूरतों पर…
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विश्व पर्यावरण दिवस – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ, धरती माँ का मान बढ़ाओ। हरियाली का करो सम्मान, तभी सुरक्षित होगा जहान। स्वच्छ पर्यावरण का…
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वृक्ष धरा के रखवाले – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
वृक्षों से ही वन बनते हैं, धरती हरी भरी करते हैं। वर्षा के कारण हैं जंगल, जिससे होता सबका मंगल।1…
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जन-जागरण कविता – डॉ अनमोल कुमार
सुबह की पहली किरण बोली, चिड़ियों की चहक यूँ बोली – पेड़ लगाओ, जल बचाओ, पर्यावरण है अनमोल जी, प्रदूषण…
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फूल – रुचि मित्तल
फूल कभी शोर नहीं करते वे अपनी मौजूदगी का ऐलान खुशबू की धीमी रौशनी से करते हैं वे धरती की…
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कैसे ना हो काया कंचन – सविता सिंह
गुनगुनी दोपहर ढल चुकी, आ गयी सर्द सघन यामिनी| मृण्मयी नैनों में इंतजार लिए, प्रतीक्षारत विकल कामिनी| काले कुंतल अब…
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