मनोरंजन

जब जाग रही होती है सारी दुनिया – गुरुदीन वर्मा

 

जब जाग रही होती है सारी दुनिया,

तो मैं सो रहा होता हूँ ,

और बुन रहा होता हूँ अपने ख्वाब,

ख्वाबों में अपनी बस्ती,

बस्ती में तलाश रहा होता हूँ वह जगह,

जहाँ है मेरा विराम,

जहाँ मैं पूजा करता हूँ अमन की,

और जब सो रहे होते हो तुम,

तो मैं देख रहा होता हूँ ,

रोशनी लेकर अपने हालात,

कि मुझको कितना पसीना,

और बहाना है,

ताकि मैं बन सकूँ उनके जैसा,

जो मौज करते हैं,

ऊंची मीनारों और महलों में,

जो रहते हैं अच्छे शहरों में,

नहीं है जिनको कोई कष्ट,

और सो रहे हैं निश्चिंत होकर।

 

जब दौड़ रही होती है सारी दुनिया,

जब सो रही होती है सारी दुनिया,

तब मैं जागकर सारी रात,

सोच रहा होता हूँ उनके बारे में,

जिनके पास नहीं है,

सोने के लिए आशियाना,

जिनके पास नहीं है,

एक वक़्त की भी रोटी,

जो सो जाते हैं भूखे-प्यासे,

फुटपाथ पर सुंदर सपनों में,

जो संतुष्ट है टूटी झौपड़ी में।

– गुरुदीन वर्मा, तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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