उत्तराखण्ड

जीवन्ती’देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के तत्वावधान में “एक शाम विश्व शांति के नाम”

utkarshexpress.com देहरादून – ‘जीवन्ती देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक राष्ट्रीय पंजीकृत संस्था के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय (ऑनलाइन) कवि सम्मेलन वरिष्ठ साहित्यकारों के सान्निध्य में अत्यंत गरिमा एवं विधिवतपूर्ण सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसे संस्था की संयोजिका श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका ने अपनी मधुर वाणी में प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का विधिवत संचालन संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह द्वारा किया गया।

इस भव्य काव्य संध्या में मंचासीन अतिथियों में मुख्य अतिथि आदरणीया श्रीमती मंजू श्रीवास्तव (वरिष्ठ साहित्यकार) की स्नेहिल उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती इंदु मैत्रा जी द्वारा की गई।

विशिष्ट अतिथियों के रूप में –

डॉ. आराधना सदाशिवम (सिंगापुर) – वैज्ञानिक विधि विशेषज्ञ (लीगल प्रोफेशनल),

श्रीमती संगीता चौबे ‘पंखुड़ी (कुवैत) – संस्थापिका अंजुमन पंखुड़ी,

नेपाल से पधारे सम्मानित साहित्यकार—

प्रजापति नेगी, कविराज भट्ट, रमेश पन्त ‘मितबन्धु’(शिक्षक) एवं खिमानन्द बडू (समाज-सेवक) की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

यह साहित्यिक आयोजन “एक शाम विश्व शांति के नाम” विषय पर आधारित रहा, जिसमें विश्व शांति, मानवता, प्रेम एवं भाईचारे का सशक्त संदेश प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति एवं काव्य-पाठ से मंच को समृद्ध करने वाले साहित्यकारों में श्रीमती मंजू श्रीवास्तव, डॉ. विद्युत प्रभा चतुर्वेदी, श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह, जी.के. पिपिल, श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका, कुमार विजय ‘द्रोणी, डॉ. भारती मिश्रा, श्रीमती संगीता वर्मानी, श्रीमती महेश्वरी कनेरी, श्रीमती निशा ‘अतुल्य, दर्द गढ़वाली, श्रीमती सुलभा बिल्लौरे, श्रीमती रेखा जोशी, श्रीमती नीरू गुप्ता ‘मोहिनी, श्रीमती सिद्धि डोभाल ‘सागरिका, नरेंद्र दीक्षित, सहित अनेक साहित्य साधकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

सभी कवियों ने अपनी सशक्त, भावपूर्ण एवं विचारोत्तेजक रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया तथा भरपूर सराहना प्राप्त की।

अध्यक्ष कविता बिष्ट ‘नेह’ ने अपनी रचना “शांति का संदेश फैले, देश का कल्याण हो…” प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मणि अग्रवाल ‘मणिका’ ने निषेध था किया शिवा, न जाइए न जाइए।अप्राप्त सूचना प्रिये! न मान को घटाइए, सुनाकर वातावरण को काव्य-रस से सराबोर कर दिया।

डॉ. भारती मिश्रा की प्रस्तुति “देवभूमि की पावन मिट्टी कहे पुकार-पुकार के… ने खूब सराहना अर्जित की।

जी के पिपिल जी ने “वक़्त हमारे संग कर बैठा ये कैसा परिहास रे पुष्प नहीं उगते उपवन में उगे कंटीली घास रे”

सिद्धि डोभाल ‘सागरिका ने “पादपों ने खोल दी है, पल्लवों की डोर” सुनाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया।

सम्पूर्ण कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक प्रस्तुति में संवेदना, सामाजिक सरोकार एवं सौंदर्यबोध की सुगंध अनुभव की गई। यह काव्य संध्या सभी उपस्थितजनों के हृदय में अविस्मरणीय स्मृतियाँ छोड़ गई।

कार्यक्रम का समापन मुख्य अतिथि श्रीमती मंजू श्रीवास्तव एवं इंदु मैत्रा ने अध्यक्षीय उद्बोधन द्वारा हुआ जिसमें उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए साहित्य के माध्यम से विश्व शांति के संदेश को और सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

अंत में संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से विदेशों से जुड़े सभी साहित्यकारों की सक्रिय सहभागिता एवं उत्कृष्ट काव्य-पाठ के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

‘जीवन्ती देवभूमि के तत्वावधान में आयोजित यह साहित्यिक अनुष्ठान पूर्व आयोजनों की भाँति अत्यंत प्रभावशाली, सुव्यवस्थित एवं सफल सिद्ध हुआ। सफल एवं सुंदर आयोजन हेतु समस्त कविगण, साहित्यकारों, श्रोताओं एवं दर्शकों को बधाई देते हुए संस्था द्वारा आयोजित इस गरिमामयी साहित्यिक अनुष्ठान को सफल बनाने हेतु आप सभी का सादर आभार ज्ञापित किया।

(अध्यक्ष: कविता बिष्ट ‘नेह’- जीवन्ती देवभूमि साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था)

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