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दिले-ईमान तो भय क्या – गुरुदीन वर्मा

 

पिलाकर एक घूंट प्रेम की वो,

हो जाते हैं इस गलत फहमी के शिकार,

कि अपनी तो इसमें नफा है,

और गंवायी नहीं हमने एक कोड़ी,

शायद इसी स्वार्थ में,

वो लूटते हैं मुझको,

लेकिन मुझको नुकसान नहीं हुआ,

और मैं उनसे ज्यादा फायदे में हूँ।

 

उनकी कसौटी-ईमानदारी क्या है,

अगली बार मेरी बाजी शुरू है,

कोई अपनापन नहीं होगा उनसे,

होगी सिर्फ नफरत मुझको।

और मेरी खासियत यह है कि,

मैं लुटकर दगाबाजों की परीक्षा लेता हूँ ,

ठोकर खाकर संभलता हूँ।

 

यही है मेरे जीवन की हकीकत।

आज तक की मेरी कहानी,

इन्हीं विपरीत हालातों से,

मुकाबला करके मुझको,

अपनी मंजिल तक पहुंचता हूँ ,

दिले-ईमान तो भय क्या।

– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद

तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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