मनोरंजन
बात ख़त्म – सविता सिंह

तुम बोलो या ना बोलो,
हमको सुनना है बात ख़त्म।
हो चाहे जिसके भी तुम ,85w
तुम बस मेरे बात ख़त्म।
चाहा बहुत, न चाहे तुमको,
पर ये हो गया बात ख़त्म।
बिना छुए ही छुए हृदय को,
दिल में बस तुम हो बात ख़त्म।
दूरी, उम्र, बचकानी बातें
भर दिए बचपना बात ख़त्म।
जो कहना था, कह चुका मन,
अब क्या कहना बात ख़त्म।
-सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर




