मनोरंजन

  हम क्यों लगाये यहाँ – गुरुदीन वर्मा

 

हम क्यों लगाये यहाँ, दिल यूँ किसी से।

ऐतबार हमको नहीं, यहाँ किसी दिल पे।।

छोड़कर हाथ कल को, वह चल देंगे।

रह जायेंगे हम अकेले, कल को यहाँ पे।।

हम क्यों लगाये यहाँ—————–।।

 

हमको मिला था कल, खूबसूरत कोई चेहरा।

मान के उसको अपना,बांध लिया था हमने सेहरा।।

मगर उसको जरूरत थी, महल और दौलत की।

पछता रहे हैं अब हम, अपनी उस नादानी पे।।

हम क्यों लगाये यहाँ——————-।।

 

उसके लिए हमने, क्या नहीं किया था।

अपने लहू से उसको, चमका दिया था।।

इल्जाम फिर भी उसने, हम पर लगाया।

बहाता है आँसू दिल, उसकी बेवफ़ाई पे।।

हम क्यों लगाये यहाँ—————–।।

 

अब तो हमें शक है, यहाँ हर हसीना पर।

दाग लगा है यहाँ, हर किसी दामन पर।।

नाराज हो चाहे, कोई मेरी इस बात से।

बहकेंगे अब नहीं हम, हसीन सूरत पे।।

हम क्यों लगाये यहाँ—————।।

– गुरुदीन वर्मा आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

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