हेल्थ

विश्व स्वास्थ्य दिवस – डॉ क्षमा कौशिक

सच्चा धन तो स्वास्थ्य है, स्वास्थ्य बिना धन व्यर्थ।
गया स्वास्थ्य कब पा सकें, कितना खर्चो अर्थ।।
कितना खर्चो अर्थ, पूर्व सा तन कब रहता।
खा सकता बस पथ्य, सभी की करुणा सहता।।
कहे सुजन सुन बात, नहीं लगता कुछ अच्छा।
सच ही कहते लोग, स्वास्थ्य धन होता सच्चा।।

साथी इस संसार में तरह-तरह के लोग।
कुछ करते हैं योग नित, कुछ जिह्वा रस भोग।।
कुछ जिह्वा रस भोग, सदा मर्जी का खाते।
खोकर अपना स्वास्थ्य, अंत में हैं पछताते।।
सौ बातों की बात, स्वास्थ्य है सच्ची थाथी।
खो देता जो स्वास्थ्य, नहीं सुख पाता साथी।।
-डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून, उत्तराखंड

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