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वो मगर नहीं समझ सके हमको – गुरुदीन वर्मा

वो मगर नहीं समझ सके हमको, प्यार हमने किया बहुत जिनको।

उम्मीद उनसे बहुत थी हमको, हमने माना था अपना दिल जिनको।।

वो मगर नहीं समझ सके हमको——————।।

 

हमने कोशिश हरदम यही की, चोट हमसे उनको लगे नहीं।

हरवक्त हमने उनको खुशी दी, आँखों से आँसू उनके गिरे नहीं।।

वो मगर हो नहीं सके हमारे, हमने दिया था हर सुख जिनको।

वो मगर नहीं समझ सके हमको—————-।।

 

हमपे शक है उनको ऐसा क्या, वो खफा रहते हैं हमसे।

हम सच्चे दिल से कहे तो, हमको प्यार है सिर्फ उनसे।।

वो मगर दूर रहते हैं हमसे, ख्वाब अपना बनाया है जिनको।

वो मगर नहीं समझ सके हमको—————–।।

 

हम जैसा साथी उनको यहाँ पर, और कोई नहीं मिल सकेगा।

उनके लिए जितना हमने किया, कोई इतना नहीं कर सकेगा।।

वो मगर साथी नहीं बन सके, हमने किया बहुत आबाद जिनको।

वो मगर नहीं समझ सके हमको——————।।

– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद

तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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