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ग़ज़ल – रीता गुलाटी

चलो जिंंदगी को हसीं हम बना दे।
खुशी से रहे घर को जन्नत बना दे।
न सोचो कभी तुम बुरा अब किसी का।
जियें और जीने की सबको दुआ दें।
जिये प्यार मे भूल नफरत जहां की।
चलो जिन्दगी को मुहब्बत बना दें।
बना आईना कमरे मे सजा जो।
वही आज टूटा तू दिल मे छुपा दे।
सताना नही गम मे डूबा है वो जो
वो दीपक है बुझता आँधी से बचा ले।
नही हम करे कुछ गलत अब किसी से।
करे नेक करमो को जग को दिखा दे।
छुए अब बुलन्दी को सुत भी हमारा।
चलो मिलके *ऋतु आज उसको दुआ दे।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़




