क्यों बनाये जाते रिश्तें ? – गुरुदीन वर्मा

क्यों बनाये जाते हैं ये रिश्तें,
जबकि सच तो यह है,
कि कोई भी नहीं मरता है,
मरने वाले के साथ कभी भी।
और सच यह भी है,
कि जब होती है आदमी के पास पूंजी,
वह होता है दुनिया की पूंजी,
जुड़े होते हैं उससे सब लोग,
जिन्दा होते हैं तब तक ही रिश्तें सभी।
लेकिन जब आते हैं बुरे दिन,
तो छोड़ जाते हैं सभी उसको अकेला,
माँ-बाप तक नहीं पहचानते उसको,
क्यों बनाये जाते हैं ये रिश्तें।
तस्वीर ऐसी ही थी वह,
शक नहीं होता था कभी भी,
सोचता था हर कोई तब,
एक दूसरे की भलाई दिल से,
अपने सपनों में सबको बसाकर।
कभी सोचा नहीं था ऐसा,
कि जिनको अरमान समझकर,
पाल रहा है वह दरख़्त,
बनेंगे एक दिन वो ही कांटें,
और कर देंगे लहूलूहान दरख़्त को।
क्यों बनाये जाते हैं ये रिश्तें,
आज पूरा एक वर्ष हो गया,
बहुत समझदार है वह,
बहुत बचत करते हैं रुपयों की वो,
कि खर्च नहीं किया उन्होंने आज तक,
एक रुपया भी मुझसे बात करने में।
और एक मैं हूँ कि,
गंवा देता हूँ हर महीने कई रुपये,
उनसे बात करने के लिए,
क्या मेरा वहाँ जाना उचित है,
क्या उनको मेरी जरूरत है,
क्यों बनाये जाते हैं ये रिश्तें।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)




