मनोरंजन
तुम्हें छूना – रुचि मित्तल

किसी मंज़िल का मिल जाना नहीं
बल्कि हर उस डर का
चुपचाप उतर जाना है
जिसे मैं रोज़
अपने भीतर ढोती हूँ।
तुम्हारे पास..
मुझे बेहतर बनाने की
कोई जल्दी नहीं होती
और यही बात
मुझे बेहतर बना देती है।
तुम पूछते नहीं..
कि मैं क्या छुपा रही हूँ,
क्योंकि तुम्हारी ख़ामोशी
मुझसे…
सच की माँग नहीं करती।
अगर प्यार..
किसी को बदलने की
कोशिश नहीं
बल्कि उसे
वैसा ही रहने देने की
हिम्मत है
तो तुम..
मेरी ज़िंदगी का
वह अकेला सच हो
जिसे…
मैं साबित नहीं करना चाहती
बस…
जीना चाहती हूँ।
©रुचि मित्तल, झज्जर, हरियाणा



