मनोरंजन
तेरा फरेब भंवर – श्याम कुंवर भारती

जल रहा है दिल मेरा आग तूने ही खूब लगाई है।
भला चंगा था बहुत हाल ए खस्ता तूने ही बनाई है।
टूटकर टुकड़े कांच के जुड़ जाते हैं फिर भी कभी।
मैं बिखर जुड़ न पाया मेरे टुकड़ों तूने ही बिखराई है।
प्यार मुझसे है ही नहीं इकरार किया ही क्यों था।
लेके नाम तेरा हो रही जमाने में मेरी रुसवाई है।
जब दोस्त हो तुम्हारे जैसा दुश्मन की क्या जरूरत है।
तोड़ के सारे कसमें वादे आंसुओ तूने ही डुबाई है।
क्यों किया इश्क मुझसे और हाथ गैर के हाथ में।
देखा जाता नहीं ये बेवफाई आंख मेरी डबडबाई है।
भ्रम था भारती तू ही है मेरा चैन ओ सुकूं दिल का ।
भंवर फरेब में डूबा कर मुझे तूमने ही बड़ी भरमाई है।
श्याम कुंवर भारती , बोकारो, झारखं




