मनोरंजन
ग़ज़ल – रीता गुलाटी

वो ऩज़रो को झुकाना जानते हैं।
जो टूटा दिल,फसाना जानते हैं।
वो सबको गुण सिखाना जानते है।
प्रगति की राह पाना जानते हैं।
है खूबी यार तुझ मे क्या बताऊँ।
वो रोते को हँसाना जानते हैं।
है वो इक फरिश्ता जो मिलने आया।
हमे वो खिलखिलाना जानते हैं।
कहे वो बात ऐसी दिल जलाऐ।
वो दुखती रग दबाना जानते है।
वो करते हैं मदद सब मुफलिसो की।
ज़ग़त मे जग़म़ग़ाना जानते है।
घिरे हैं मुशकिलों से यार हम तो।
म़ग़र फिर मुस्कुराना जानते हैं।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़




