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शिव जी सावन में आना – आर. सूर्य कुमारी

देर न करना , आना ही आना ,
जल्दी से आना , सावन में आना,
हम आंख बिछाए जल – तारण में ।
डम – डम डमरू का नाद लेकर ,
फिर से सावन में आना ।
त्यौहार मनाना पावन में ।
प्रेम – प्रीति की फुहार लेकर ,
फिर से सावन में आना ,
त्यौहार मनाना प्रांगण में ।
तब आशीष- बहार लेकर ,
फिर से सावन में आना ,
त्यौहार मनाना कानन में ।
सावन का सोमवार लेकर ,
फिर से मनभावन में आना ,
त्यौहार मनाना गायन में।
देर न करना ,आना ही आना,
जल्दी से आना , सावन में आना,
हम आंख बिछाए जल – तारण में ।
– आर. सूर्य कुमारी-विभूति फीचर्स)




