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भोजपुरी (बिगड़ल बयार) – श्याम कुंवर भारती

 

बिगड़ल बयार सभ लाचार  दूभर सांस लिहल हमार।

जेने देखा आदमी बीमार सभ के बा चढ़ल  बुखार।

 

ग़ाछ वृक्ष कटाइल एहि से धरती सब बंजर बन आइल।

भालू बानर शेर चिता सभ गांव चलल खोजल शिकार।

 

कोख माटी बांझ भइल रसायन खाद से खेती भइल।

गाय भैंस पशु के पाले ना गोबर खाद गइल उजार।

 

अचडा कचड़ा कल कारखाना सब  बहे नदी नाला में ।

मछली जलचर मरले पानी ज़हर भइल बढल व्यापार ।

 

चिल गिद्ध कौवा गौरइया दिखे ना घर आकाश में।

मरल पशु ग़मके कीड़ा मकोड़ा बढ़ खेती भईल बेकार।

 

जंगल पेड़ बिना अकाल औरी सुखा बाढ़ बढ़ी आवे ।

समय पर बरखा जाड़ा ना तेज गर्मी घाम बढ़ल अपार।

 

चूहा बिलार सांप घड़ियाल सब जरूरी प्रकृति पर्यावरण के।

जल जंगल जमीन बचावे खातिर भारती सोचल विचार।

– श्याम कुंवर भारती (राजभर, बोकारो,झारखंड, ph- .9955509286

 

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