सच्ची मोहब्बत है तुमसे – गुरुदीन वर्मा

सच्ची मोहब्बत है तुमसे, ऐसा नहीं मैं कर पाता।
कर दूँ मैं खूं मोहब्बत का, दिल का नहीं खूं कर पाता।।
सच्ची मोहब्बत है तुमसे——————।।
कोशिश तुमने तो की बहुत, मुझको मरवाने की बेदिल।
नफरत हो गई तुमसे मगर, बेवफ़ाई तुमसे नहीं कर पाता।।
सच्ची मोहब्बत है तुमसे——————–।।
जमाने से की दुश्मनी, मैंने खुश रखने को तुमको।
बर्बाद होकर भी तुमसे, खत्म तुमको नहीं कर पाता।।
सच्ची मोहब्बत है तुमसे——————-।।
मुझको बना के खिलौना तुमने, दिन बिताये मौज में।
बुझ रहे हैं मेरे चिराग़, बे-रोशन तुम्हें नहीं कर पाता।।
सच्ची मोहब्बत है तुमसे——————–।।
उनसे तो मैं अच्छा हूँ, जिनको है शौक हुर्रों का।
माना कि मैं हूँ शराबी, नीलाम तुम्हें नहीं कर पाता।।
सच्ची मोहब्बत है तुमसे——————–।।
ना खुद को मान अकेला, ना मुझको समझ तू दुश्मन।
हाँ, बन गया मैं खलनायक,तुम्हें रुलाने की जहद नहीं कर पाता।।
सच्ची मोहब्बत है तुमसे——————–।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)




