रक्षा बंधन – डॉ. प्रियंका सौरभ

राखी का ये प्यारा त्यौहार,
भाई-बहन के रिश्ते का उपहार।
नन्ही कलाई पर बंधी एक डोर,
भावनाओं से भरी, स्नेह का शोर।
हर बहन की आंखों में सपना,
भाई का साथ, न कोई अपना।
वचन है रक्षा का, प्रेम अपार,
सिर्फ धागा नहीं, है संस्कार।
मीठी-सी मुस्कान लिए बहना आई,
थाल सजाकर आरती लाई।
रोली, चावल, और मिठाई साथ,
बंधा है इसमें बचपन का हाथ।
भाई ने भी मुस्कुराकर कहा,
“तू ही तो है मेरा खुदा।”
तेरे आंचल की छांव में पलूं,
हर जनम में तुझको ही बहन बनाऊं।
राखी की इस रीत में है अपनापन,
दूरी भी हो, फिर भी है बंधन।
ना कोई छल, ना दिखावा है,
ये प्रेम तो बस भावना का बहाव है।
सावन की खुशबू, बारिश की फुहार,
हर दिल में बसता रक्षाबंधन का त्यौहार।
संस्कारों की ये सुनहरी थाली,
हर घर में लाए खुशहाली।
चलो मिलकर मनाएं ये पर्व,
रिश्तों को दें फिर एक गर्व।
हर राखी बने भाई की ढाल,
हर बहना बने उस पर मिशाल।
-प्रियंका सौरभ , उब्बा भवन, आर्यनगर,
हिसार (हरियाणा)-127045
(मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप)



