उत्तराखण्ड

कविता कारवाॅं “में कवियों ने किया ‘बस यूं ही’ पुस्तक का विमोचन

utkarshexpress.com रुड़की – उत्तराखंड के संस्कृत शिक्षा निदेशक रहे आनंद भारद्वाज काव्य संग्रह ‘बस यूॅं ही’ का विमोचन पूर्व विधायक चौधरी यशवीर सिंह ,विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के उपकुलपति डॉ श्रीगोपाल नारसन, वरिष्ठ साहित्यकार सुरेंद्र कुमार सैनी,वरिष्ठ शायरा शाहिदा शेख व अन्य कवियों द्वारा किया गया।
वर्ष 2025 की विदाई वेला पर आयोजित कविता कारवाॅं का आयोजन साहित्यकार श्रीमती अर्चना त्यागी के आवास ‘उत्सव’ में किया गया। आयोजन में पूर्व विधायक चौधरी यशवीर सिंह की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का आरंभ गोपाल शर्मा द्वारा दिल्ली के विभिन्न रूपों को उकेरती हुई एक समसामयिक रचना से किया गया। सौ सिंह सैनी ने नीरज की कविता ‘जब तलक है लेखनी हम तुम्हें मरने ना देंगें ‘सुनाई। साहित्यकार कृष्ण सुकुमार ने विभिन्न शायरों के चयनित शेर सुना कर सभी को प्रभावित किया। उनके द्वारा प्रस्तुत ‘ सूखे पत्तों को हल्की हवा ही काफी है, तुम मुॅ़ह फेर के निकले ये सज़ा ही काफी है’ काफी पसंद किया गया।डॉ श्री गोपाल नारसन द्वारा नवाज़ देवबंदी की रचना ‘भूखे बच्चों की तसल्ली के लिए,माँ ने जब पानी पकाया देर तक ‘सुनाकर सभी की वाही वाही लूटी वही उन्होंने माँ पर स्वरचित कविता भी सुनाई। कविता कारवां के संयोजक पंकज त्यागी ‘असीम’, ने अपनी एक ग़ज़ल ‘हाथ तो बाद में पसारा था पहले उसने अना को मारा था’सुनाई। वर्तमान समय में घृणा और विभाजनकारी प्रवृत्तियों का विरोध करती हुई रचना अनुपमा शर्मा द्वारा पढ़ी गई। डॉ शालिनी जोशी पंत ने महाभारत के परिप्रेक्ष्य में एक लंबी कविता के अंश सुना कर सबको प्रभावित किया। निखिल पंत ने डॉ हरिवंश राय बच्चन के परिचय सहित उनकी एक रचना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। श्याम कुमार त्यागी के हास्य/ व्यंग्य के गीत को भी सराहना मिली। नवीन शरण निश्चल द्वारा श्रीमती प्रोमिला दुआ की एक नज़्म को प्रस्तुत किया गया । डॉक्टर आनंद भारद्वाज ने सोम ठाकुर का सुप्रसिद्ध गीत ‘सागर चरण पखारे गंगा शीश चढ़ावे नीर ,मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर’ सुनाया ।कार्यक्रम में राजीव शर्मा,अंजुल त्यागी,अंजु त्यागी, अनिल वर्मा अमरोहवी,निधी जैन, शाहिदा शेख़, रश्मि त्यागी व अर्चना त्यागी ने भी काव्य पाठ किया।
रिपोर्टर – महताब आज़ाद

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