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शब्दों का जादू – ज्योती वर्णवाल

शब्दों का जादू ऐसा चलाया छलिए ने,
हर मन को मोह लिया, हर हृदय जीत लिया।
बंसी की धुन में पिरोकर, अमृत ऐसा घोला,
प्रेम का पाठ पढ़ाया, हर द्वेष धो दिया।
कभी मैया यशोदा को मीठी मनुहार से,
कभी ग्वाल-बालों संग नटखट शरारतों से।
गोपियों के हठ को भी, अपनी मुस्कान से,
बांधा ऐसा मन, छूटा न बंधन चाहतों से।
कुरुक्षेत्र के रण में जब, अर्जुन हुए निराश,
सारथी बन दिखाया उनको, धर्म का सच्चा पथ।
कर्मयोग का संदेश देकर, भर दिया विश्वास,
शब्दों से रचा ऐसा जादू, हर भ्रम हुआ ध्वस्त।
शब्द नहीं थे वे प्रभु के, वो तो थे प्रेम के सूत्र,
ज्ञान की गंगा बहाई, हर जीव को तार दिया।
उनकी हर एक बात में, छिपा था गहरा सूत्र,
शब्दों का जादू ऐसा, हर युग को संवार दिया।
– ज्योती वर्णवाल , नवादा, बिहार




