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हाँ, अब मुझको इनसे – गुरुदीन आज़ाद

हाँ, अब मुझको,
इनसे कोई वास्ता नहीं,
काँटों के सिवा मुझको,
पथ में मिला ही क्या है,
हाँ, अब मेरा,
इनसे कोई रिश्ता नहीं।
काट रहा हूँ मैं सजा,
इनके साथ की,
इनको मिल जायेगा,
इनके नसीब का,
इनको जो करना है,
वह ये करें,
हाँ, अब इनकी राह,
मेरा रास्ता नहीं।
ये खुद ही लिखें,
अपने पसीने से अपना नसीब,
ये खुद ही बनाये,
अपनी बस्ती और हस्ती,
जाना है इनको जिधर भी,
बेरोकटोक ये जायें,
हाँ, इनकी तकदीर का,
मैं विधाता नहीं।
ये खुद बचाये अपनी इज्जत,
या फिर ये तैयार रहें,
भुगतने को अपने कर्मों का फल,
क्योंकि इनकी तरहां मुझको भी,
अपनी जिंदगी और जान प्यारी है,
और जीना है मुझको भी अब,
सिर्फ और सिर्फ खुद के लिए,
अब मैं, इनके लिए,
मरने वाला नहीं हूँ ,
हाँ, अब मुझको,
इनसे कोई वास्ता नहीं।
– गुरुदीन वर्मा.(आज़ाद)
तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)




