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हरियाणा के विश्व विद्यालयों में भ्रष्टाचार का काला सच – डॉ. सत्यवान सौरभ

चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्तीय घोटाले, भर्ती अनियमितताएं और सत्ता के दुरुपयोग ने शिक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल

utkarshexpress.com हरियाणा – हरियाणा के उच्च शिक्षा क्षेत्र में हाल ही में सामने आया भ्रष्टाचार का मामला न केवल राज्य की चार प्रमुख विश्वविद्यालयों की साख को धक्का पहुंचाने वाला है, बल्कि यह पूरे शैक्षणिक ढांचे की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जिन विश्वविद्यालयों का नाम इस विवाद में सामने आया है—महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक; गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार; दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल; और श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र—ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। लेकिन अब इन संस्थानों के शीर्ष पदों पर बैठे कुलपतियों पर लगे भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, भर्ती घोटालों और पद के दुरुपयोग के आरोपों ने इनकी छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है।

राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) द्वारा 1-2 अप्रैल 2026 को शुरू की गई जांच ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। यह केवल कुछ व्यक्तियों की कथित गलतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करता है, जहां शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में भी पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव दिखाई देता है। इन आरोपों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि उच्च शिक्षा संस्थानों का नेतृत्व ही संदिग्ध हो, तो वहां पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य किस प्रकार प्रभावित हो सकता है।

सबसे चौंकाने वाला मामला दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल से जुड़ा हुआ है। यहां के कुलपति पर लगभग 50 करोड़ रुपये के छात्र कल्याण कोष के गबन का आरोप है। आरोपों के अनुसार, इस राशि को सरकारी बैंकों में उच्च ब्याज दर पर सुरक्षित रखने के बजाय निजी बैंकों में कम ब्याज पर फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया गया, जिससे विश्वविद्यालय को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। यह केवल वित्तीय लापरवाही का मामला नहीं लगता, बल्कि इसमें सुनियोजित अनियमितता की आशंका भी जताई जा रही है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता बल्कि नैतिक पतन का भी उदाहरण होगा।

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। यहां पौधारोपण के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटाले की बात कही जा रही है। कागजों में हजारों पौधों की खरीद और रोपण दिखाया गया, लेकिन वास्तविकता में इनका कोई अस्तित्व नहीं मिला। इसके अलावा, भर्ती प्रक्रियाओं में भी पक्षपात और नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं, जहां योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर पसंदीदा व्यक्तियों को नौकरी दी गई।

गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार में गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां आरक्षण नियमों का उल्लंघन, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और बिना आवश्यक योग्यता के नियुक्तियां किए जाने के आरोप हैं। यह स्थिति न केवल संस्थान की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।

इसी तरह, श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में भी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों और आरक्षण रोस्टर के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं। आयुर्वेद जैसे पारंपरिक चिकित्सा विज्ञान के विकास के लिए स्थापित इस संस्थान में इस प्रकार की अनियमितताएं बेहद चिंताजनक हैं।

इन सभी मामलों में एक समान पैटर्न दिखाई देता है—पद का दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताएं, और प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता का अभाव। यह स्थिति अचानक उत्पन्न नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे वर्षों से चली आ रही एक कमजोर और राजनीतिक रूप से प्रभावित प्रणाली है। हरियाणा में विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्तियां लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव के अधीन रही हैं, जहां योग्यता और अनुभव की बजाय नजदीकी और वफादारी को प्राथमिकता दी जाती रही है। इसका परिणाम यह हुआ कि संस्थानों में जवाबदेही और नैतिकता कमजोर होती गई।

जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही कार्रवाई का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि यह जांच निष्पक्ष और समयबद्ध हो। अक्सर देखा गया है कि इस प्रकार के मामलों में प्रारंभिक कार्रवाई तो होती है, लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक ढिलाई के कारण मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। यदि इस बार भी ऐसा हुआ, तो यह न केवल दोषियों को बचाने का काम करेगा, बल्कि जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचाएगा।

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों पर पड़ रहा है। विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। जब संस्थान के संसाधनों का दुरुपयोग होता है, तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है। प्रयोगशालाओं की कमी, योग्य शिक्षकों की अनुपलब्धता, और बुनियादी सुविधाओं का अभाव छात्रों के शैक्षणिक विकास में बाधा बनता है। ऐसे में छात्रों का मनोबल गिरता है और उनके करियर की संभावनाएं प्रभावित होती हैं।

हरियाणा जैसे राज्य में, जहां पहले से ही बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, इस प्रकार के घोटाले युवाओं में निराशा और असंतोष को बढ़ाते हैं। जब उन्हें यह महसूस होता है कि मेहनत और योग्यता के बावजूद अवसर निष्पक्ष रूप से नहीं मिलेंगे, तो यह सामाजिक असंतुलन को भी जन्म देता है।

इस स्थिति से निपटने के लिए केवल जांच और सजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। सबसे पहले, कुलपति और अन्य उच्च पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाया जाना चाहिए। इसके लिए स्वतंत्र चयन समितियों का गठन किया जा सकता है, जो राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर निर्णय लें।

दूसरे, विश्वविद्यालयों में वित्तीय लेन-देन की नियमित और स्वतंत्र ऑडिटिंग अनिवार्य की जानी चाहिए। इससे फंड के दुरुपयोग को समय रहते रोका जा सकेगा। तीसरे, भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो।

इसके अलावा, छात्रों और शिक्षकों को भी संस्थान के प्रशासन में अधिक भागीदारी दी जानी चाहिए, ताकि वे किसी भी गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठा सकें। सूचना का अधिकार (RTI) और मीडिया की सक्रिय भूमिका भी इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।

अंततः, यह मामला केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। यदि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भ्रष्टाचार को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका असर देश के विकास पर पड़ेगा। विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे समाज के बौद्धिक और नैतिक विकास के आधार होते हैं।

इसलिए आवश्यक है कि सरकार, न्यायपालिका और समाज मिलकर इस समस्या का समाधान करें। दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और एक ऐसी प्रणाली विकसित की जाए, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता हो। तभी हम एक मजबूत और विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं, जहां युवाओं का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल हो।

– डॉ. सत्यवान सौरभ, 333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी,  हरियाणा – 127045, मोबाइल :9466526148, 01255281381 

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