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क्यों बन गया अब मैं शराबी – गुरुदीन वर्मा

*शेर- तेरी तरहां बहुत जिद्दी हूँ , तुमको एक दिन झुकना पड़ेगा।

मेरी मोहब्बत सच्ची है, मुझपे यकीन तुमको करना पड़ेगा।।*

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क्यों बन गया अब मैं शराबी, पूछो नहीं इसकी वजहां मुझसे।

किसने तोड़ा है मेरा दिल, यहाँ हो गया कौन खफ़ा मुझसे।।

क्यों बन गया अब मैं शराबी—————–।।

 

कल तक इससे करता था नफ़रत, क्यों अब दीवाना इसका हो गया।

रहता था दूर इससे कल तक मैं, क्यों आज दोस्त मैं इसका हो गया।।

क्यों आज मेरी यह चाहत बन गई, कौन हो गया बेवफ़ा मुझसे।

क्यों बन गया अब मैं शराबी——————।।

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*शेर- तुम्हारे बिना सिर्फ तुम्हारे बिना, मैं आज बना हूँ दोस्त एक शराबी।

मुझसे हो रही होगी तुमको नफरत, मुझमें नहीं थी कल यह खराबी।।*

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क्या कुछ किया नहीं मैंने तुम्हारे लिए, मैं अपनों को भी भूल गया।

अरमान अपने दिल के दबा लिये मैंने, लहू अपना भी तुमको दिया।।

क्यों तुम मुझसे करते हो नफ़रत, इसकी वजहां कहो तुम मुझसे।

क्यों बन गया अब मैं शराबी——————।।

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*शेर- बहुत रोवोगे तुम कल को, मेरी मोहब्बत याद करके।

लेकिन मैं नहीं आऊंगा अब, तुम्हारे पास लौट करके।।*

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होता अगर मैं कोई आवारा, लगा देता दाग तुम्हारे दामन पे।

बदनाम करके तुमको यहाँ पर, कर देता बर्बाद तुमको मैं।।

इजहार तुमको करनी पड़ेगी, अपनी मोहब्बत एक दिन मुझसे।

क्यों बन गया अब मैं शराबी—————।।

 

-गुरुदीन वर्मा .आज़ाद

तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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