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गीतिका – मधु शुक्ला

विघ्नहर्ता को विमल मन जब पुकारे,
दूर होते जिंदगी के खार सारे।
भक्त जन के कार्य सब निर्विघ्न निबटें,
जब कृपा करते गजानन जी हमारे।
प्रिय जिन्हें है भोग मोदक और दूर्वा,
भक्त जन के घर वही गणपति पधारे।
बुद्धि दाता को नमन हृद से करें जो ,
पुत्र शिव के वे सभी होते दुलारे।
दूर हर संताप करते हैं विनायक,
मन भजो विघ्नेश हैं उत्तम सहारे।
— मधु शुक्ला, सतना, मध्यप्रदेश




