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तुम थे ना – मीरा पाण्डेय

अधखुले मेरे गेसू .
और वो मखमली
स्पर्श सा अहसास .
वो तुम थे ना .
..
अधखुले अधर .
और नर्म सी .
मधहोशी सी बात .
वो तुम थे ना .
…
मेरे पैरो की पायल .
और वो मखमली .
जमीन का अहसास .
जहा दिल बिछे थे
तुम्हारे .
तुम ही थे ना .
..
वो अधखुली सी
मेरी आँखे .
नींद से उन्माद भरी .
हल्की मोती सी बिखरने .
मेरे चेहरे पे
तुम्हारा हाथ .
हा तुम ही थे ना .
– मीरा पाण्डेय उनमुक्त, नई ,दिल्ली




