मनोरंजन
एहसास – ज्योति श्रीवास्तव

किस तरह से कहें दिल के जज़्बात को,
जो बिताई वो घड़ियां पहर रात को।
बोझ सी ये लगी श्वास की हर घड़ी,
नम सी आंखें कहे कैसे हालात को।
ढूंढ़ती सी रही हर घड़ी हर पहर,
ये निगाहें करेंगी वयां बात को।
पास मेरे थे दिल ने जो अनुभव किया,
आस मन में जगी इक नई प्रात को।
– अरुण ज्योति श्रीवास्तव, नोएडा, उत्तर प्रदेश




