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प्रभु स्तुति – कविता बिष्ट ‘नेह’

स्वागत की बेला है आई।
सबने मिलकर धूम मचाई।।

मोदक प्रभु को भोग लगाया।
दीप जले घर द्वार सजाया।।

 

विघ्न विनाशक की हो पूजा।
प्रभु प्रसाद मिलता नित दूजा।।

मंगलमय हो जीवन सारा।
सुरभित अनुरंजन आधारा।।

 

घर-घर मंगल दीप सजाएँ।
आओ मिलकर माँगल गाएँ।।

प्रांगण-प्रांगण बजते बाजे।
सकल जगत में देव विराजे।।

 

आज सजाई नगरी सारी।
खिली हुई है बगिया प्यारी।।

द्वार-द्वार पर दीप जले हैं।
कीर्तन करते भक्त चले हैं ।।

 

मंगल मूरत देव दयाला।
सजती प्यारी मोती माला।।

करते है जीवन सुखदायक।
जनहितकारी बनते नायक।।
~कविता बिष्ट ‘नेह’, देहरादून

 

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