मनोरंजन

कविता – नीलांजना गुप्ता

 

वासना का नाम न दो

खो चुकी हूँ बहुत कुछ

अब नई पहचान न दो

प्यार को प्रिय वासना का नाम न दो।

पलटकर देखा है जब जब

दिखी हैं धूमिल दिशायें

दर्द में डूबी मिली हैं

ग्रीष्म सी तपती हवाएं

बुझ चुके हैं दीप सारे

अब कोई दिनमान न दो,प्यार को प्रिय——-

अपेक्षा मुझसे बहुत की

स्वयं पर भी दृष्टि डालो

मैं हूँ दर्पण छिपा क्या है

अब नया कोई भ्रम न पालो

हो चुके हैं मुक्त बन्धन

अब कोई व्यवधान न दो,प्यार को प्रिय———

देवता तुमको समझ

जीवन का मधु तुमको पिलाया

अधर की मुस्कान देकर

अश्रु आँखों में सजाया

हो चुका अभिशप्त जीवन

अब कोई वरदान न दो,प्यार को प्रिय———

– नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश

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