बदलो सोच अपनी तुम भी – गुरुदीन वर्मा

शेर- तुम देखो जरा इस दुनिया को/अपनी हालत और कुटिया को//
कुछ बदलो जरा अब तुम भी/अपनी भाषा और दुनिया को//
आजाद है अब यह भारत तो/कब तो कोसोगे तुम नसीब को//
तुम छोड़ो नसीब का यह रोना/बदलो किस्मत और दुनिया को//
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आज गगन पर मानव, जा रखा है अपना कदम।
बदलो सोच अपनी तुम भी, नहीं हो किसी से कम।।
आज गगन पर मानव ने———————।।
इन तूफानों से तुम मत घबराओ, ये जीवन में हैं पलभर के मेहमां।
इन काँटों का तुम हार बनाओ, इनसे ही बनता है जीवन एक नग़मा।।
नहीं छोड़ी अगर हिम्मत तुमने, मंजिल है तुम्हारी बस दो कदम।
आज गगन पर मानव ने———————।।
मेहनत से पत्थर भी पारस बन जाता है, पर्वत भी झुक जाता है।
चाहे सागर भी हो कितना ही चौड़ा, पथ उस पर भी बन गई है।।
तुम भी करो कुछ ऐसा जतन, तकदीर तुम्हारी जाये चमक।
आज गगन पर मानव ने———————-।।
तुम अपनी मुफलिसी पर नहीं आँसू बहाओ, किस्मत समझकर।
चाहे तुम अकेले हो, तुम मत निराशा लाओ, कभी अपने मुख पर।।
तुम भी जलाओ एक शमां, होगा अंधियारा कुछ तो कम।
आज गगन पर मानव ने———————।।
– गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद, तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)




