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नारी का गणित – सविता सिंह

 

चकले पर आँटे से ज्यामिति,

नमक, हल्दी, मसाले का समीकरण

सारे जोड़, गुणा, भाग का हिसाब

इज़ इक्वल टू नारी!! जिंदाबाद।

अपने हृदय रूपी बैंक को

शून्य रखते हुए भी रिटर्न करती

सर्वदा सौ प्रतिशत प्रॉफिट के साथ।

वह जीरो गुना दस जीरो नहीं

वह जीरो गुना दस सौ करती है।

जिंदगी के सारे माइनस खुद रखकर

सिर्फ प्लस प्लस और प्लस देती।

देते हुये उसे बहुत आनंद आता,

उसे कोई नहिं कहता कि क्या करो।

वो स्वयं निर्णय लेती हैं।

क्योंकि प्रायोरिटी खुद तय करती हैं।

इसलिए पहले पायदान पर कहाँ रख पाती

वो छुटी गलियाँ वो स्कूल बीते दिन।

माँ को याद कर भीगे होंगे नयन कई बार,

किंतु कोई बुलाए तो हँस कर जाती

जैसे वह जननी की नहीं, उनकी है थाती।

नहीं देखा होगा कहीं कोई ऐसा समीकरण।

गुणा भाग करती है अपने मन के केलकुलेटर से,

इज़ इक्वल टू में आता बच्चों की पढ़ाई,

पति की कुछ और फिर खुद तय करती

इस साल नहीं मायका! अगले साल जायेंगे।

अंततः माँ इज़ इक्वल टू बेटी इक्वल टू पति

फिर खुद कहती अरे माँ! ना!वो समझ जाएगी।

स्कूल के गणित में लाल रंग लाने वाली

लड़की जिंदगी की गणित में हमेशा अव्वल

यानि कुछ भी इक्वल टू करें

हमेशा सौ प्रतिशत पूर्ण समर्पण।

सच कहते हैं शून्य के आगे जैसे जुड़ जाए

दहाई, सैकड़ा, हजार और कई लाख हो जाते हैं।

इसलिए ज्यामिति त्रिकोणमिति बीजगणित

यह सारे गणित की विधाएं कि वह

वेद, उपनिषद, पुराण, खंडकाव्य महाकाव्य है।

सविता सिंह मीरा जमशेदपुर

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