मनोरंजन

गीत – जसवीर सिंह हलधर

मज़हबी उन्माद में कुछ भी नहीं है ।

मुल्क की खातिर सुधर जाओ अभागो ।।

 

आचरण इतना अपावन मत दिखाओ ।

आवरण इस्लाम का यूँ मत हटाओ ।

हो सके तो आदमी बनकर दिखा दो ,

राक्षसी पर्यावरण की राह त्यागो ।।

मुल्क की खातिर सुधर जाओ अभागो ।।1

 

खाक बनकर रह न जाये घर तुम्हारा ।

देखकर हरक़त बढ़ा  चिंतन हमारा ।

कर रहे हो काम क्यों नैतिक पतन का ,

भीड़ में बारूद विस्फोटक न दागो ।।

मुल्क की खातिर सुधर जाओ अभागो ।।2

 

जांच ली मैंने नहीं जन्नत है  कोई ।

हूर वाली आयतें मुल्लों ने बोई ।

अक्ल से पर्दा हटाकर देख लो खुद ,

बेतुकी कुछ आयतों से दूर भागो ।।

मुल्क की खातिर सुधर जाओ अभागो ।।3

 

वक्त से पहले सगों को मत सुलाओ ।

मौत के कारक घरों में मत बुलाओ ।

राष्ट्र गरिमा पाठ बच्चों को पढ़ाओ,

ज्ञान का दीपक जलाओ और जागो ।।

मुल्क की खातिर सुधर जाओ अभागो ।।4

– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून

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