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पितृ ऋण – सुनील गुप्ता

( 1 ) पितृ ऋण
उतारें जीवन रहते,
कभी न इसमें कोताही करें !!
( 2 ) मात-पिता
हैं जीवित भगवान,
इनका हर हाल में सम्मान करें !!
( 3 ) श्राद्ध पक्ष में
अपने पितरों का,
श्रद्धापूर्वक तर्पण क्रिया करें !!
( 4 ) भाव सुमन
प्रेम अश्रु बहाते,
इनका सदैव यहाँ स्मरण करें !!
( 5 ) ऋणानुबंध से
हैं हम सब बँधे हुए,
इसका यहाँ पर सदा पालन करें !!
– सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान




