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कैसे जीते यहां – डॉ आशीष मिश्र

इश्क में लोग कैसे हैं जीते यहां,
हमने लोगों को मारते देखा यहां।
प्यार है या कफन का उठता धुआ,
ठहर जाती हैं सांसों की दुनिया जहां।।
इश्क़ में लोग…..1
अपनी बातों का जो मोल देते नहीं,
प्यार कैसे करेंगे भला वो यहां।
जिनकी फितरत है धोखा चालाकियां,
वो निभाएंगे क्या प्यार का कारवां।।
इश्क में लोग कैसे….2
– डॉ आशीष मिश्र उर्वर , कादीपुर, सुल्तानपुर




