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विमान हादसा अहमदाबाद – श्याम कुंवर भारती

पानी का बुलबुला है जिंदगी आखिर फूट ही जायेगा।
सांसों का तार है नाजुक बड़ा आखिर टूट ही जाएगा।
कब कहा कैसे और किसकी सांस थम जाए मालूम नहीं।
लाख संभाल रखो प्राण पखेरु आखिर छूट ही जाएगा।
हादसा जो हुआ अहमदाबाद में दुर्घटना है या लापरवाही।
जमीन आसमान जानों काफिला आखिर लुट ही जाएगा।
जिंदगी है अनमोल बचाना इसको जवाबदेही है सबकी।
मिले शांति आत्माओ भारती पी आखिर घूंट ही जायेगा।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड



