श्रद्धांजलि – जसवीर सिंह हलधर

याद आपकी प्रिय मुखर्जी शोक गीत बन आयी है।
और लेखिनी मौन तोड़ कुछ शब्द सुमन चुन लायी है ।।
युगों युगों तक आप रहेंगे भारत भू के जन गण में।
भाषण सदा गवाही देंगे गांव शहर के प्रांगण में ।।
कैंसर है कलयुग का दानव इतना तो एहसास हुआ ।
मृत्यु सूचना मिलने पर भी तनिक नहीं विस्वास हुआ ।।
काल चक्र है सत्य सनातन सबको इक दिन जाना है ।
लेकिन समय पूर्व उठ जाना भारत पर जुर्माना है ।।
संसद के गलियारों के जो लाल कहाये जाते थे ।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सभी के ढाल कहाये जाते थे ।।
मंचो पर संबोधन सबको मंत्र सरीखा लगता था ।
ज्ञान आपका स्थापित संयंत्र सरीखा लगता था ।।
दीन हीन की पीड़ा को वो अच्छी तरह समझते थे ।
सकल विश्व में अमन चैन के बादल बने बरसते थे ।।
संबोधन ऐसा लगता ज्यों फूल पिरोएं धागों में ।
शब्द कोष भी शर्माये वो भाव लिप्त अनुरागों में ।।
आदर्शों के शिखर पुरुष का लोहा दुनियाँ मानेगी ।
कथनी औ करनी के जरिये जनम जनम पहचानेगी ।।
काल कपाली नियम अनोखे सबके आगे खाई है ।
अक्षर अक्षर शोकाकुल है पंक्ति पंक्ति घबराई है ।।
हलधर”ने अपने शब्दों के श्रद्धा सुमन चढ़ाए हैं ।
आगे लिखना मुश्किल होगा दृग में आँसूं आये हैं ।।
– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून



