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गीत – जसवीर सिंह हलधर

 

बलिदानों की गाथा के, वर्णन को नमन करें ।

भारत के वैदिक ज्ञान और, दर्शन को नमन करें ।।

 

उत्तर में इसके नगपति है, जो खड़ा सजग है सदियों से ।

इसके आंगन की हरियाली, आबाद सैंकड़ों नदियों से ।

दक्षिण पश्चिम में सिंधुराज,करते इसकी पहरेदारी ।

उत्तर पूरब की सात बहन इसके आंचल की फुलवारी ।

जीता जगता ये राष्ट्र पुरुष चिंतन को नमन करें ।।

भारत के वैदिक ज्ञान और दर्शन को नमन करें  ।।1

 

ये वेदों का निर्माता है ये विश्व गुरु कहलाता है ।

हर मज़हब का पोषण करती,ये सबकी भारत माता है ।

खंडित है इसका मानचित्र, फिर भी आकर्षित करता है ।

अपने कर्मों से वचनों से, दुनिया को सुरभित करता है ।

इस धरती के पीपल ,बरगद चंदन को नमन करें ।।

भारत के वैदिक ज्ञान और दर्शन को नमन करें  ।।2

 

इसको भी दास बना डाला लोभी राजा हैवानों ने ।

घावों पर नमक़  लगाया था गौरे आका शैतानों ने ।

कुछ राजाओं की गलती से सदियों खायीं इसने ठोकर ।

नेहरू जिन्ना के झगड़े  में , आज़ाद हुआ खंडित होकर ।

गांधी सुभाष के त्याग और, जीवन को नमन करें ।।

भारत के वैदिन ज्ञान और दर्शन को नमन करें  ।।3

 

अब जाग उठा भारत अपना, मंगल तल तक यान उड़ाता है ।

मज़बूत बहुत है लोक तंत्र, दुनिया में जाना जाता है ।

अपने भारत की सेना से, ये भूमंडल घबराता है ।

भारत माता का राष्ट्र केतु, चंदा पर भी लहराता है ।

वीरों की यादों के दर्पण,  उपवन को नमन करें ।।

भारत के वैदिक ज्ञान और दर्शन को नमन करें ।।4

– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून

 

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