क्यों बहा रहे हो आँसू ? – गुरुदीन वर्मा

क्यों बहा रहे हो आँसू , क्यों तुम्हें क्या नहीं मिला।
मेरी किस्मत तो बुरी है, तुम्हें सुख क्या नहीं मिला।।
क्यों बहा रहे हो आँसू —————————–।।
हमको तो माना था तुमने, अपनी खुशियों का लुटेरा।
डरते थे मिलने से हमसे, शक का आँखों में था कोहरा।।
हम तो दुश्मन है तुम्हारे, उससे तुम्हें क्या नहीं मिला।
क्यों बहा रहे हो आँसू —————————–।।
रास नहीं आई तुम्हें तो, मेरी मोहब्बत और शराफत।
मेरी मुफलिसी की तस्वीर, मेरे ख्वाबों की इबारत।।
वह तो मसीहा था तुम्हारा, ख्वाब उससे क्या नहीं मिला।
क्यों बहा रहे हो आँसू —————————–।।
मैंने क्या बिगाड़ा था तेरा, मुझसे हुई है क्या खता।
मैंने तुम्हें माना था अपना, तुझपे हक अपना बता।।
मैंने क्यों बहाया लहू वह, उससे चमन क्यों नहीं खिला।
क्यों बहा रहे हो आँसू —————————–।।
नहीं है कमी कोई तुम्हारे घर में, महलों का है घर तेरा।
फूल हर कदम पे बिछे हैं, दौलत से दामन है तेरा भरा।।
अब क्या रह गई ख्वाहिश, दिल को चैन क्यों नहीं मिला।
क्यों बहा रहे हो आँसू —————————–।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)



