मनोरंजन

कविता – नीलांजना गुप्ता

मेरी कविता हर हृदय की मलिका बनकर आएगी।

सूखे अधरों पर मधुर मुस्कान बनकर छायेगी।

 

गम के साये में रहे जो छटपटाते दर्द से,

चुभते उन घावों में औषधि लेप बनकर छायेगी।

 

तेज झंझावात से उजड़े हुये गुलशन को फिर,

बसन्त का रख रूप रक्तिम माँग भरने आयेगी।

 

टूटी हृदय वीणा के तारों को फिर नूतन साज दे,

भरकर मधुर झंकार जीवन रागनी यह गायेगी।

 

युग के कोलाहल में खोयेगी नहीं यह कल्पना,

सुनहरे वर्णों में कुछ इतिहास लिखकर जायेगी।

 

हों नहीं सकती विलय यह समय रूपी यामनी में,

बनकर ध्रुवतारा उसी के अंक में मुस्कायेगी।।

-नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश

 

 

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button