धर्म
नव वर्ष – सविता सिंह

सुखी शाख पर अचानक
पत्ते चिटक पड़े,
कहीं पलाश, कहीं अमलतास
रंग बिखर पड़े।
सूने मन में फिर से जगी
एक हल्की सी सरगम,
उमंग और हर्ष के सुर
क्यों फिर मचल पड़े।
आया चैत प्रतिपदा,
नव वर्ष का संदेश लिए,
हर ओर नई आस,
नव सृजन का परिवेश लिए।
बीते कल की धूल झाड़,
मन फिर सजने लगे,
जीवन में फिर से खुशियों के
पल पनप पड़े।
-सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर




