मनोरंजन

बसंत  – वैशाली रस्तोगी

प्रकृति की रौनक बढ़ी, आई फागुन बहार की ,

बसंत पंचमी लगते देखो, हरियाली खिल उठी है ।

पीली सरसों फूली है, चारों ओर खुशहाली है,

पेड़ों पर नए पत्तों की हरियाली छाई है।

फूलों की खुशबू से महक उठा है वातावरण,

बसंत की ठंडी हवा में खुशी की लाईलै।

पक्षियों के गीतों से गूंज उठा है आकाश,

जीवन में नई ऊर्जा और उमंग लाती है।

बसंत के आगमन से प्रकृति भी हो जाती है निखर,

फूलों की रंगीनता से धरती भी हो जाती है गुलजार।

हर तरफ खुशी और आनंद का माहौल है,

बसंत की ऋतु में जीवन है बेहाल है।

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर,

हर दिल में खुशी और आनंद का संचार है।

प्रकृति की रौनक बढ़ी, आई फागुन बहार की,

जीवन को नई दिशा देती है बसंत की ऋतु।

– वैशाली रस्तोगी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

 

 

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