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सावन आया – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

सावन आया सावन आया,
भीगी भीगी पवन को लाया
धरती भीगी पहन हरियाली,
फूलों की खुशबू ने बाग महकाया।।
सावन आया सावन आया
कोयल गाती पत्ते हिलते
मन में ख़ुशियों को हैं भरते।
बारिश की बौछारों ने भिगाया
प्रेम प्याला फिर छलकाया।।
सावन आया सावन आया
छत पे ले आई पकौड़े की थाली,
अदरक की चाय की ले आई प्याली।
पैरों ने पायल को झनकाया,
झूम झूम के सावन गाया।।
सावन आया सावन आया
साजन का संदेशा आया,
संदेशे ने पलकों को भिगाया।
साजन तुमने बहुत सताया,
कब मैं कहूंगी साजन आया।।
सावन आया सावन आया
– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव,
जगदलपुर राजिम छत्तीसगढ़




