मनोरंजन

अंग्रेजी नववर्ष – रुचि मित्तल

साल बदलने से वक़्त नहीं बदलता

बस कैलेंडर के पन्ने नई तस्वीर माँगते हैं।

हम वही रहते हैं

थोड़े और थके हुए

थोड़े और समझदार,

कभी-कभी बस ज़्यादा चुप।

हर नया साल एक नयी दुआ जैसा होता है,

जो दिल के किसी कोने में

सोए सपने को जगा देता है।

कुछ लोग पुराने सालों में रह जाते हैं

और हम उन्हें

यादों की रोशनी में देखते रहते हैं।

नया साल आता है तो लगता है

जैसे ज़िन्दगी फिर एक मौका देना चाहती है

कि इस बार हम खुलकर साँस लें

पूरी तरह जिये

और किसी एक पल को

पूरी तरह अपना बना लें।

अंदर कहीं बस इतना कहने का मन करता है

इस बार भले ही कुछ भी ख़ास न हो

बस सुकून हो।

©रुचि मित्तल, झज्जर , हरियाणा

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