काहे भूली गइला – श्याम कुँवर भारती

तोहरे खातिर तड़पे हमरो परनवा |
काहे भूली गइला हमके सजनवा |
सावन के बहार रहे
बरखा के फुहार रहे |
बिरह में बरसे मोर नयनवा |
काहे भूली गइला हमके सजनवा |
मनवा उदास रहे ,
मिलन के प्यास रहे |
देखि देखि ताना मारे हमके जमनवा |
काहे भूली गइला हमके सजनवा |
केहु जाला पूरब पश्चिम ,
केहु मुलतानी |
हमरा के छोड़ी के पिया
कईला नादानी |
कहा चली गइला हमरो सजनवा |
काहे भूली गइला हमके सजनवा |
अँखिया से रही रही बहेला निरवा |
बितली उमरिया मोर गिनते दिनवा |
रहिया तकत मोर छछने परनवा |
काहे भूली गइला हमके सजनवा |
लगवे जे रहता पिया हिया से लगवती।
देखी देखी तोहके जिया हम जुड़वती।
खन खन खनके मोर बैरी कंगनवा ।
काहे भूली गईला हमके सजनवा।
चमके जब बिजुरिया दिल दरदिया बढ़ावे।
झम झम बरिस बरखा धरती पियसिया जुड़ावे।
अंग अंग लहके मोर उमडल बदनवा।
काहे भूली गईला मोर हमके सजनवा
– श्याम कुँवर भारती (राजभर )
बोकारो झारखंड -मोब . 9955509286



