मनोरंजन

गणगौर – सुनील गुप्ता

( 1 ) निकली
गणगौर की सवारी,
बैठ नंदी हाथी घोड़ा पालकी !
चहुँओर आनंद खुशियाँ पसरी.,
चलीं संग-साथ अनेकों झाँकी !!
( 2 ) महकी
आँगन कानन क्यारी,
गण संग चली नाचती गौरी !
बाजत ढोल मृदंग मंजिरें..,
चले झूमते सभी नर नारी !!
( 3 ) करके
नगर शहर परिक्रमा,
झाँकी पहुंची मंदिर गोविन्ददेवजी !
लगा काजल मेहंदी रोली मोली..,
करते इसरजी गणगौर की आरती !!
( 4 ) बाँटते
घेवर मीठी फीणी,
चली सभी को देते प्रसादी !
है उत्सव ये आनंद खुशियों का…,
मिले मन को अनंत सुकून शांति !!
( 5 ) पूजते
सभी गौरा-ईसरजी,
पार्वती-शंकर वर लाती !
सुहाग की अमर कामना साथ..,
माताएं गणगौर व्रत सफल बनाती !!
– सुनील गुप्ता, जयपुर,,राजस्थान |

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