मनोरंजन
ग़ज़ल – रीता गुलाटी

गुजारा वक्त भी हमने सभी ने आजमाया है,
भुला कर दर्द सारे अब सभी से प्यार पाया है।
बड़ी शिद्दत से घर अपना बड़े दिल से सजाया है,
तराना इक खुशी से अब बड़े दिल से वो गाया है।
मिली है गर्दिशे हमको सताया भी जमाने ने,
चलो भूले सभी बातें नया अब साल आया है।
कहे कैसे अजी दिल की सुने ना आज भी कोई,
बड़ी मुश्किल से घर अपना अरे मैने बचाया है।
जो गुजरा था भले यारा नही कुछ खास अब पाया,
नई खुशियाँ नया मौसम नया फ़िर साल आया है।
खिले हैं फूल बाँगो में लगे सबको बहुत प्यारे,
बगीचे में जरा देखो चमन का फूल भाया है।
-रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़




