मनोरंजन

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

सुनो देखूँ तुम्हारा चाँद सा चेहरा निगाहों में,

जरा तू पास अब आ जा,मुझे ले ले तू बाँहो में।

 

बुनें हैं ख्याब जो दिल मे,दिखा देते तो अच्छा था,

वही खुशबू वही जादू है इन बहती फिजाओं में।

 

गुजारी है उम्र मैने,लगे वो कैदखाने सी,

मिलेगी कब रिहाई भी,बता देते निगाहों में।

 

न जाने आज दिल से वो,खता क्या अब हुई मुझसे,

करो तुम माफ अब मुझको,हुऐ मेरे गुनाहों मे।

 

तुम्हें अपना सदा माना,नही सोचा है बेगाना,

मिले आशीष अब हमको,जरा ले लो पनाहों में।

 

तुम्हारे प्यार की खुशबू से महक उठता है मन मेरा,

तुम्हें पाती रही हरदम मेरे मन की उड़ानों मे।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button