जीवन्ती देवभूमि साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था का करवाचौथ के अवसर पर ऑनलाइन आयोजन

utkarshexpress.com – करवाचौथ के पावन अवसर पर जीवन्ती देवभूमि साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था द्वारा आयोजित ऑनलाइन करवाचौथ मिलन समारोह एक मनमोहक सांस्कृतिक संध्या में परिवर्तित हो गया।
मंच की गरिमा बढ़ाने हेतु मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती अपर्णा सिन्हा (संगीत शिक्षिका, इंदु देवी संगीत केंद्र की संस्थापिका), अध्यक्षता श्रीमती उषा डंगवाल (स्वर कोकिला, संगीतकार) ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती मीनाक्षी बौखण्डी श्रीमती अल्का गुलाटी तथा वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’, डॉ. भारती मिश्रा की उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ (संयोजक एवं सलाहकार) द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से विधिवत प्रारंभ हुआ।
सुगठित संचालन श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ (अध्यक्ष, जीवन्ती देवभूमि) ने कुशलता से किया।
स्क्रीन पर जब सखियाँ सोलह श्रृंगार से सुसज्जित, रंग-बिरंगी साड़ियों में दमकती हुईं नज़र आईं, तो वातावरण में उत्सव की चहक और परंपरा की मधुर सुगंध घुल गई। हर चेहरे पर उल्लास, आत्मीयता और सांस्कृतिक गरिमा का सुंदर संगम झलक रहा था। सखियों की ठिठौलिया, मुस्कान, स्नेहमयी बातें इस डिजिटल मंच को जीवंत कर रही थीं।
कार्यक्रम का आरंभ स्नेहिल शुभकामनाओं के आदान-प्रदान से हुआ। इस सुहानी शाम में श्रीमती अपर्णा सिन्हा , श्रीमती उषा डंगवाल, श्रीमती अल्का गुलाटी श्रीमती मीनाक्षी बौखण्डी, श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’, श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’, डॉ. भारती मिश्रा, श्रीमती मीनाक्षी गुप्ता , श्रीमती रेखा जोशी, श्रीमती लक्ष्मी डबराल, श्रीमती मीना बिष्ट, श्रीमती संगीता वर्मानी, श्रीमती सुलभा बिल्लौरे और श्रीमती जया रावत ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से इस शाम को सुर, लय और भावनाओं से भर दिया।
कहीं फिल्मी गीतों की मधुरता थी, कहीं ग़ज़लों की नज़ाकत, तो कहीं मौलिक कविताओं के माध्यम से प्रेम, श्रृंगार और नारी सौंदर्य का भावपूर्ण चित्र उभर आया।
चाँद की प्रतीक्षा के बीच यह एक घंटे का मिलन, वास्तव में एक अद्भुत उत्सव में बदल गया — जहाँ हँसी की खनक, शृंगार की चमक और सखियों का स्नेह, सब एक साथ घुल-मिल गए। अंत में सभी ने एक-दूसरे को करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और इस अनूठे मिलन की सुंदर स्मृतियाँ अपने मन-मंदिर में सहेज लीं। यह ऑनलाइन आयोजन सुखद परंपरा और संस्कृति से जुड़ने का मधुर माध्यम बना और यह भी सिद्ध कर गया कि दूरी केवल भौगोलिक होती है दिलों की निकटता सदैव अटूट रहती है।
कार्यक्रम का समापन मुख्य अतिथि श्रीमती अपर्णा सिन्ह के सारगर्भित आशीर्वचन और अध्यक्ष श्रीमती उषा डंगवाल के प्रेरक उद्बोधन तथा उनकी मधुर प्रस्तुति से हुआ। संस्था की संस्थापक कविता बिष्ट ‘नेह’ ने सभी का दिल की गहराइयों से आभार व्यक्त किया। इस सुंदर आयोजन ने हर मन को प्रसन्न कर दिया और चाँद की प्रतीक्षा को सचमुच सुगम और आनंदमय बना दिया।




