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दावोस में गूंजा मध्यप्रदेश का आत्मविश्वास – पवन वर्मा

utkarshexpress.com – वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में इस बार मध्यप्रदेश की उपस्थिति ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के प्रमुख उद्योगपति अब मध्यप्रदेश की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में अपनाई गई उद्योग हितैषी नीतियों का असर अंतरराष्ट्रीय मंच पर साफ और स्पष्ट रुप से दिखा। दावोस में वैश्विक उद्योगपतियों और निवेशकों ने मध्यप्रदेश को लेकर गंभीर रुचि दिखाई।
राज्य सरकार की ओर से भी यह संकेत साफ रहा कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है। नीति, प्रशासन और बुनियादी ढांचे में किए गए सुधार अब लगातार परिणाम दे रहें हैं। इसी कारण दावोस में हुई बातचीत सामान्य औपचारिकताओं से आगे बढ़कर साझेदारी और निवेश की संभावनाओं तक पहुंची।

नीतियों ने बनाया भरोसे का आधार – निवेशकों के लिए सबसे अहम सवाल होता है स्थिरता और भरोसा। मध्यप्रदेश सरकार ने इसी मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत की है। सिंगल विंडो सिस्टम, निर्णय प्रक्रिया में तेजी और प्रक्रियाओं के सरलीकरण ने निवेश के रास्ते आसान किए हैं।
दावोस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बैठकों से यह संदेश गया कि राज्य सरकार निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ उसे जमीन पर उतारने की क्षमता भी रखती है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश को लेकर चर्चा केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं रही।

नवकरणीय ऊर्जा से बनी नई पहचान – नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। सोलर, विंड और पंप स्टोरेज परियोजनाओं पर तेज़ी से काम हो रहा है। ओंकारेश्वर में जलाशय पर सोलर पैनलों के माध्यम से बिजली उत्पादन राज्य के बदलते ऊर्जा मॉडल का उदाहरण है। यहां किसानों को सोलर पंप देकर कृषि क्षेत्र को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। नवकरणीय स्रोतों से सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले राज्यों में मध्यप्रदेश का नाम आना दावोस में चर्चा का बड़ा विषय रहा।

भारत की आर्थिक उड़ान में राज्यों की भागीदारी – अब भारत वैश्विक आर्थिक मंच पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल पहुंचना इसी आत्मविश्वास को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दावोस में कहा कि भारत बहुत जल्द दुनिया की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में शामिल होने जा रहा है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मध्यप्रदेश जैसे राज्यों की भूमिका अहम मानी जा रही है। आईटी, टूरिज्म, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र राज्य की आर्थिक क्षमता को विस्तार दे रहे हैं।

मालदीव के साथ सहयोग के संकेत – दावोस में मालदीव के मंत्री एवं अर्थशास्त्री डॉ. मोहम्मद सईद के साथ हुई चर्चा ने यह स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर भी सक्रिय रुख अपना रही है। टूरिज्म, मत्स्य पालन, आईटी और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रस्तावित मालदीव दौरा इस बात का संकेत है कि प्रदेश सरकार इन चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर है। भारत और मालदीव के बीच पहले से मजबूत संबंधों में मध्यप्रदेश की भूमिका नए अवसर खोल सकती है।

औद्योगिक रफ्तार और रोजगार – मध्यप्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों की बढ़ती रफ्तार का सीधा असर रोजगार पर दिखाई दे रहा है। एग्रीकल्चर, पॉल्ट्री, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है। राज्य के पास पर्याप्त लैंड बैंक, ऊर्जा संसाधन और अनुकूल भौगोलिक स्थिति है। देश के मध्य में स्थित होने का भी लाभ है,जो परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करता है। एमओयू के जरिए सामने आ रहे निवेश प्रस्ताव रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। बेरोजगारी दर में आई गिरावट इसी दिशा की ओर इशारा करती है।

दावोस से साफ हुआ संदेश – दावोस में हुई बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश अब वैश्विक निवेश मानचित्र पर अपनी जगह बनाने की ओर तेजी से बढ़ चुका है। उद्योग, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मोर्चे पर सरकार की सक्रियता एक संगठित आर्थिक सोच को दर्शाती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह साबित किया है कि विकास केवल आंकड़ों का विषय नहीं है। नीति और परिणाम के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में किए गए प्रयासों ने मध्यप्रदेश को नई पहचान दी है। दावोस से मिले संकेत बताते हैं कि राज्य आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार बनने की तैयारी में है। (विनायक फीचर्स)

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