फागुन रेखाचित्र बनाये, मन के कोरे कैनवास पर। कैसे कोई संयम रख ले, किसी अनबुझी एक प्यास पर – मणिका अग्रवाल

utkarshexpress.com देहरादून- जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक राष्ट्रीय पंजीकृत संस्था एवं हिमालय विरासत ट्रस्ट, उत्तराखण्ड (अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासी समन्वयक – लेखक गाँव) के संयुक्त तत्वावधान में कवि सम्मेलन 08 फरवरी 2026 (रविवार) पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री आदरणीय डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के रचना सभागार, प्रीतम रोड, देहरादून में अत्यन्त गरिमामय रूप से विधिपूर्वक सम्पन्न हुआ।
मंचासीन अतिथियों में मध्य प्रदेश से पधारे विवेक चतुर्वेदी (वरिष्ठ साहित्यकार), कार्यक्रम के अध्यक्ष मशहूर शायर जनाब अंबर खरबंदा, विशिष्ट अतिथि जगदीश बावला, श्रीमती साधना , डॉ. बेचैन कंडियाल , श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’, डॉ. विद्युत प्रभा चतुर्वेदी, श्रीमती आशना कंडियाल नेगी गौरव विवेक सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ की मधुर वाणी से किया गया।
कार्यक्रम का सफल, सुसंगठित एवं विधिवत संचालन संस्था की संयोजक श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ द्वारा किया गया।
यह साहित्यिक आयोजन संस्था की महामंत्री डॉ. भारती मिश्रा के जन्मदिवस के पावन उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, साथ ही श्रीमती आशना कण्डियाल नेगी जी एवं श्रीमती संगीता वर्मानी का भी जन्मदिन मनाया। इस उत्सव से कार्यक्रम में आत्मीयता, उल्लास और उत्सव का भाव और अधिक सघन हो उठा।
इस काव्यात्मक अनुष्ठान में उपस्थित समस्त साहित्य-प्रेमी, सुधीजनों का हार्दिक अभिनंदन एवं सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित कवियों एवं श्रोताओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता से सभागार को साहित्यिक ऊर्जा, संवेदना एवं रचनात्मक उल्लास से ओतप्रोत कर दिया।
संस्था के पदाधिकारियों की उपस्थिति सराहनीय रही।
कार्यक्रम में विशेष रूप से मध्य प्रदेश से पधारे विवेक चतुर्वेदी, उत्तर प्रदेश से पधारे गौरव विवेक, जनाब अंबर खरबंदा, डॉ. बेचैन कंडियाल, रजनीश त्रिवेदी , श्रीमती आशना कंडियाल नेगी, श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’, श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’, डॉ. भारती मिश्रा, श्रीमती मंजू श्रीवास्तव, श्रीमान श्रीवास्तव, रजनीश त्रिवेदी, डॉ. विद्युत प्रभा चतुर्वेदी ‘मंजू’, रमेश चन्द्र, एल.के. त्रिपाठी, शायर दर्द गढ़वाली, सुभाष चंद वर्मा, श्रीमती सिद्धि डोभाल ‘सागरिका’, शायर जनाब शादाब, सचिन चौहान, सोमेश्वर पाण्डेय, सत्यप्रकाश शर्मा ‘सत्य’, डॉ. नीता कुकरेती, संजय प्रधान, पवन कुमार ‘सूरज’, श्रीमती महेश्वरी कनेरी, रजनीश त्रिवेदी , सतीश बंसल, डॉ. संजीव शर्मा, श्रीमती साधना शर्मा, डॉ संजीव शर्मा , जगदीश बावला, श्रीमती भारती आनंद, शिव चरण शर्मा, श्रीमती शोभा पाराशर, सुनील पाराशर, श्रीमती स्वाति ‘मौलश्री’, श्रीमती संगीता वर्मानी, श्रीमती अर्चना झा ‘सरित’, श्रीमती महेश्वरी कनेरी, संजय प्रधान, आनंद सिंह राजपूत, सुनील दत्त सहित अनेक साहित्य साधकों की गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम अत्यन्त सफल, सार्थक एवं स्मरणीय बना।
सभी कवियों ने अपनी सशक्त, भावपूर्ण एवं विचारोत्तेजक रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया तथा भरपूर तालियाँ बटोरीं।
कविता बिष्ट ‘नेह’ ने तुम्हें “श्याम बंसी बजानी पड़ेगी सदा प्रेम दौलत लुटानी पड़ेगी।” पढ़कर श्रोताओ को मंत्रमुग्ध कर दिया। मणि अग्रवाल ‘मणिका’ “फागुन रेखाचित्र बनाये, मन के कोरे कैनवास पर। कैसे कोई संयम रख ले, किसी अनबुझी एक प्यास पर।” सुनाकर सभागार को काव्य रस से सराबोर कर दिया। डॉ. भारती मिश्रा ने “देवभूमि की पावन मिट्टी कहे पुकार पुकार के” सुनाकर खूब तालियाँ बटोरी। सिद्धी डोभाल सागरिका ने “पादपों ने खोल दी है, पल्लवों की डोर” सुनाकर भाव विभोर कर दिया।
सभी रचनाकारों के काव्य-पाठ के प्रत्येक क्षण में संवेदना, सामाजिक सरोकार एवं सौंदर्यबोध की सुगंध अनुभव की गई।
कार्यक्रम के मध्य सभी उपस्थितजनों ने संस्था की महामंत्री डॉ. भारती मिश्रा, श्रीमती आशना कंडियाल नेगी एवं श्रीमती संगीता वर्मानी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की। यह साहित्यिक आयोजन सभी के हृदय में अविस्मरणीय स्मृतियाँ छोड़ गया। कवि सम्मेलन का समापन क्रमशः मुख्य अतिथि विवेक चतुर्वेदी एवं अध्यक्ष जनाब अंबर खरबंदा के उद्बोधन से हुआ। दोनों संस्थाओ की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ एवं श्रीमती आशना कंडियाल नेगी तथा महामंत्री डॉ. भारती मिश्रा ने सभी अतिथियों साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया। उत्तर प्रदेश से आये गौरव विवेक का सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहता है। जीवन्ती’ देवभूमि एवं हिमालयन विरासत ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह साहित्यिक आयोजन पूर्व आयोजनों की भाँति अत्यन्त प्रभावशाली, सुव्यवस्थित एवं लोकप्रिय सिद्ध हुआ।




