मनोरंजन
बस तेरे बिना – सविता सिंह

घर का हर इक कोना सूना है तेरे बिना,
कैसे कह दूँ जीना मुमकिन है तेरे बिना।
खिलखिलाहट, हँसी, वो मासूम सी हर इक बात,
सब ही लगता है जैसे अधूरा इक तेरे बिना।
दिल के सीने में धड़कता है तेरा ही एहसास,
पर ये धड़कन भी लगे बेजान इक तेरे बिना।
शुभ दिन आए तो आँखें भीग जाती है केशव ,
कैसे मनाऊँ मैं कोई भी खुशी इक तेरे बिना।
तेरी हर याद है जैसे कोई प्यारा नगीना,
पर ये ख़ज़ाना भी लगे अधूरा इक तेरे बिना।
वक़्त भर देता है घाव कहते सब हैं लोग ,
पर ये सच कैसे मान लूँ इक तेरे बिना।
तू रहे खुश, यही दुआ है यही हर इक पल,
सदा रहना है बस यूँ बेजार इक तेरे बिना।
मीरा ये दर्द किसी से भी कहा जाता नहीं,
बस कोई जी रहा है जीवन इक तेरे बिना।
– सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर




